Family & Parenthood
एक माँ का दर्द
बेटा जब विदेश गया तो मैंने सोचा था कि यह उसकी ज़िंदगी की सबसे अच्छी बात होगी। मैंने खुद को रोते हुए भी मुस्कुराने पर मजबूर किया जब वह एयरपोर्ट पर जा रहा था। पिछले पाँच सालों में वह सिर्फ दो बार घर आया। हर बार आता है तो अजनबी लगता है। उसकी आदतें बदल गई हैं, खाने का स्वाद बदल गया है, बात करने का अंदाज़ बदल गया है। मैं अपने बच्चे को याद करती हूं जो मेरी गोद में सोता था। अब वह आदमी बन गया है और मैं उसे पहचानती भी नहीं। मगर मैं उसे कभी नहीं बताऊंगी कि यह दर्द कितना गहरा है। माँ को बस देना आता है, लेना नहीं।
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